Sunday, May 15, 2011

इराक का दर्द है “द लॉस्ट सेल्यूट”


इराकी पत्रकार मुंतज़िर अल ज़ैदी का जूता आज तक लोग नही भूले हैं। दरअसल वो जूता इतना खास बन गया था कि दुनिया के कौने कौने मे उस जूते के चर्चे आम हो गये। इराकी जनता के गुस्से का इज़हार करने के लिये अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर फेंका गया वो जूता भारत मे भी कई लोगों के लिये प्रेरणा बन गया।

पूरी दुनिया के लोग आज तक ये जानने को उत्सुक रहते हैं कि आखिर मुंतज़िर अल ज़ैदी को जूता फेंकने की ज़रुरत क्यों पड़ी? इसी बात को ध्यान मे रखकर जाने-माने फिल्म निर्माता निर्देशक महेश भट्ट ने इस संवेदनशील विषय को लोगों के सामने रखने के लिये रंगमंच की दुनिया में कदम रख दिये।

महेश भट्ट ने मुंतज़िर अल ज़ैदी की किताब द लॉस्ट सेल्यूट टू प्रेसीडेन्ट बुश पर आधारित एक नाटक की रचना कर डाली। शनिवार और रविवार की शाम राजधानी दिल्ली के श्रीराम सेन्टर में महेश भट्ट के नाटक द लॉस्ट सेल्यूट का मंचन किया गया। नाटक मे दर्शाया गया कि किस तरह से अमरीका ने शान्ति के नाम पर छोटे से मगर सम्पन्न राष्ट्र इराक को बर्बाद किया। किस तरह से आंतक और जैविक हथियारों के बहाने बगदाद शहर पर आग बरसाई गयी। किस तरह से अमरीकी सेना ने मासूम बच्चों और औरतों पर कहर बरपाया। यहां तक कि इराक में अस्पतालों को जंग के दौरान बमों के हवाले कर दिया गया। ये नाटक उस आम आदमी की कहानी है जो अपनी आँखों से अपने घर, शहर और वतन की बर्बादी देखता है और जब उसकी हिम्मत जवाब दे जाती है तो वो कुछ कर गुज़रने की ठान लेता है। दरअसल ये नाटक अमरीका की तानाशाही को लोगों के सामने रखता है जो किसी भी मुल्क पर किसी भी बहाने से हमला करने की फिराक मे रहता है। या फिर ये कहें कि दुनिया भर के मुल्कों को डराने की कोशिश करता रहता है। ताकि वो अपनी जायज़ और नाजायज़ नीतियों को दुनिया पर थोप सके।

अस्मिता थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने करीब एक घण्टे की इस प्रस्तुति में दर्शकों के सामने मुंतज़िर अल ज़ैदी की पूरी कहानी बंया की। अभिनय की अगर बात की जाये तो नाटक का मुख्य किरदार महेश भट्ट की अगली फिल्म में बतौर नायक एन्ट्री करने वाले इमरान जाहिद ने अदा किया। पूरे नाटक की जान मुंतज़िर अल ज़ैदी का ये किरदार ही था। लेकिन इमरान जाहिद यहां अपने अभिनय की छाप नही छोड़ पाये। नाटक मे कई जगहों पर अन्य किरदार इमरान पर हावी दिखाई दिये। आवाज़ और अभिनय के मामले में इमरान अपने किरदार मे आत्म विश्वास भरने मे नाकाम रहे तो नाटक के सूत्रधार की शक्ल मे विरेन बसोया ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। जार्ज वी बुश का किरदार निभाने वाले ईश्वाक सिंह ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया। इन दोनों की संवाद अदायगी काबिल-ए-तारीफ थी। शिल्पी मारवाह ने अपने छोटे पर सशक्त किरदार को जीवंत बनाने का सफल प्रयास किया। इसके अलावा राहुल खन्ना, हिमांशु, सूरज सिंह, गौरव मिश्रा, पंकज दत्ता, शिव चौहान, रंजीत चौहान और मलय गर्ग ने  संवाददाताओं की भूमिका मे अपनी आवाज़ को दूर तक पंहुचाया।

नाटक का संगीत और गायन पक्ष कमज़ोर दिखाई दिया। जिसकी ज़िम्मेदारी संगीता गौर को दी गयी थी। पार्श्व संगीत की कमी तो नाटक में शुरु से ही दिख रही थी जबकि पार्श्व संगीत के लिये नाटक मे काफी गुंजाइश थी। कोरस ने गीतों के साथ कोई न्याय नही किया। यहां तक अभिनेताओं और कोरस के बीच तालमेल की कमी लगातार दर्शकों को खलती रही। कई जगहों पर गीतों मे कोरस खुद ही भटक गया। यहां तक फैज़ अहमद, साहिर लुधियानवी और हबीब जलीब के जनगीत दर्शकों को समझ मे ही नही आये।

नाटक के निर्देशक अरविन्द गौर लगातार कई सालों से रंगमंच कर रहे हैं। अरविन्द सामाजिक और रानीतिक नाटकों के लिये जाने जाते हैं। इसलिये उनके निर्देशन मे इस नाटक से उम्मीदें ज़्यादा थी। एक माह की रिहर्सल के बाद भी वो मुख्य किरदार निभाने वाले इमरान ज़ाहिद को पूरी तरह तैयार नही कर पाये। जबकि अन्य किरदार दर्शकों पर छाप छोड़ने मे कामयाब रहे।

नाटक की स्क्रिप्ट और संवाद दर्शकों को पसन्द आये। लखनऊ के राजेश कुमार  मुंतज़िर अल ज़ैदी की किताब से ली गयी कहानी को नाटक बनाने मे सफल दिखाई दिये। मैकअप पक्ष को श्रीकान्त वर्मा ने संवारा। नाटक मे लाइटिंग पक्ष भी अच्छा रहा।

मंचन के दौरान खासतौर पर इराकी टीवी पत्रकार मुंतज़िर अल ज़ैदी दिल्ली आये थे। उन्होने नाटक देखने के बाद कहा कि इस नाटक को देखकर उनकी वो सारी यादें ताज़ा हो गयी जो उनके साथ गुज़रा। उन्होने गांधी जी की सराहना करते हुये कहा कि ये देश बहुत सौभाग्यशाली है क्योंकि गांधी जी यहां रहा करते थे। जिन्होने उन्हे भी सच के लिये लड़ने की प्रेरणा दी।

नाटक के निर्माता महेश भट्ट ने कहा कि हम सभी को अन्याय के खिलाफ चुप रहने के बजाय आवाज़ उठानी चाहिये। जब तक हम आवाज़ बुलन्द नही करेगें तब तक हमारी सुनवाई नही होगी। सब साथ आईये और अपने हक के लिये, सच के लिये आवाज़ बुलन्द किजीये।

इस दौरान अभिनेत्री पूजा भट्ट, सांसद जया प्रदा, अभिनेता डीनो मारियो, सन्दीप कपूर आदि मौजूद रहे।

Monday, April 25, 2011

सपा उम्मीदवार की नागरिकता पर विवाद

परवेज़ सागर, नई दिल्ली।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद की बेहट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी घोषित किए गए उमर ख़ान की नागरिकता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उमर ख़ान के पिता सरफराज ख़ान पाकिस्तानी नागरिक हैं और लंबे समय से भारतीय वीज़ा (एलटीवी) पर यहां रह रहे हैं। हालांकि उमर खान की माता भारतीय नागरिक हैं लेकिन उमर अप्रैल 1997 में पाकिस्तान में पैदा हुए थे। उस वक़्त उनकी मां पाकिस्तान गयी हुईं थी। उमर के पिता ने भारतीय नागरिकता के लिए कई साल पहले गृह मंत्रालय को अर्ज़ी दी थी लेकिन उनकी इस अर्ज़ी पर अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है।

उमर की नागरिकता को लेकर मचे इस बवाल से उनके टिकट पर संकट के बादल मंडराने लगें हैं। उमर दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी के दामाद हैं और उन्हीं की पैरवी पर मुलायम सिंह यादव ने उन्हे काज़ी रशीद मसूद के भतीजे और विधायक इमरान मसूद का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इमरान को नकुड़ सीट से टिकट मिला है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ इमरान मसूद नकुड़ सीट के बजाए बेहट से ही चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं इसीलिए वो उमर की नागकरिकता के विवाद को गुपचुप तरीक़े से हवा दे रहे हैं। सहारनपुर में समाजवादी पार्टी के लोग उमर समर्थक और उमर विरोधी ख़ेमें में बंट गए हैं। इस खेमे बंदी से उमर की नागरिकता का विवाद गहराता जा रहा है। आगे चल कर मुलायम सिंह यादव भी इस विवाद की चपेट मे आ सकते हैं।

उमर का विरोध करने वालों का आरोप है कि उमर खान एक विदेशी नागरिक हैं क्योंकि उनके पिता सरफराज़ खान एक पाकिस्तानी नागरिक हैं और भारत मे कोई भी चुनाव लड़ने के लिए उसका भारतीय नारगिक होना पहली शर्त है। जबकि उमर खान का पक्ष लेने वालों का कहना है कि उनके पिता पाक नागरिक हैं लेकिन वो शादी के बाद से ही लॉन्ग टर्म वीज़ा पर भारत में ही अपनी पत्नी के साथ रहते हैं और उन्होंने गृहमंत्रालय में नागरिकता के लिये आवेदन किया हुआ है। उमर खान की माता भारतीय हैं और वो सहारनपुर के नवाब पठेड़ परिवार से ताल्लुक़ रखती हैं। उमर का पक्ष लेने वालों का कहना है कि शादी के बाद उमर की मां ने अपने पति को साफ़ तौर पर कह दिया था कि वो पाकिस्तान नहीं जाएंगी और हमेशा भारत मे ही रहेंगी।

अचानक नागिरकता के मसले पर सुर्खियों मे आये उमर खान दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी के दामाद हैं और ये रिशतेदारी उनके लिए जहां टिकट पाने मे फायदेंमद साबिक हुई वहीं अब नागरिकता का विवाद गहराने पर जंजाल भी बन गयी है। जानकार इस पूरी कवायद को सियासी क़रार दे रहे हैं। उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी कल्याण सिंह के साथ हाथ मिलाने का खामियाज़ा भुगत चुकी है इसी वजह से अब वो मुसलमानों को रिझाने की कोशिश मे लगी हुई है। अयोध्या फैसला आने के बाद मुलायम सिंह और सैयद अहमद बुख़ारी के बीच काफी नज़दीकियां बढ गई हैं। इस बीच अहमद बुखारी ने मुलायम सिंह के मन माफिक कुछ काम भी किये। उसी के एवज मे सपा प्रमुख ने सपा के राष्ट्रीय महसचिव एंव राज्यसभा सांसद काजी रशीद मसूद के भतीजे इमरान मसूद का टिकट काटकर उमर खान को दे दिया। हालाकि इमरान मसूद ने अभी तक खुलकर इस बात का विरोध नही जताया है लेकिन सूत्रों का कहना है कि वो बेहट से अपना टिकट काटे जाने पर खासे नाराज़ हैं और अपने ग़ुस्से का इज़हार करने के लिये सही मौके का इन्तज़ार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नये परिसीमन मे सहारनपुर की मुज़फ्फराबाद सीट अब बेहट विधानसभा के नाम से जानी जायेगी। इमरान पिछली बार समाजवादी पार्टी से बग़ावत कर इस सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इमरान मसूद ने यहां लगातार तीन बार विधायक और मंत्री रहे जगदीश राणा को हराया था और वो दोबारा इसी सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इमरान मानते हैं कि अगर वो इसी सीट से चुनाव लड़ेगें तो उनकी जीत पक्की है। उमर खान के टिकट को लेकर अभी तो सिर्फ समाजवादी पार्टी में ही अन्दरुनी तौर पर विरोध के स्वर फूटें हैं। मामला ज़्यादा बढ़ने विपक्षी पार्टियां भी इस मुद्दे को भुनाने मे पीछे नही रहेंगी। सूत्रों का कहना कि इस मामले को लेकर हो रहे विरोध को इमरान मसूद गुट भी हवा देने मे जुटा है। दरअसल इस मामले के उठने और उमर खान का टिकट कटने से अगर किसी को फायदा होगा तो वो सिर्फ इमरान मसूद हैं।

अब देखने वाली बात ये है कि तमाम विवादों और अटकलों के बीच सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव इस मामले को लेकर क्या कदम उठायेंगें। अगर वो उमर खान का टिकट काटते हैं तो अहमद बुखारी से बने उनके रिश्तों मे खटास आना लाज़मी है। मुलायम सिंह इस वक्त ये जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। अगर उमर का टिकट नही काटा जाता तो चुनाव के दौरान सपा का एक गुट उमर के ख़िलाफ़ किसी और के साथ हो सकता है। इससे ज़िले की बाक़ी सीटो पर भी समाजवादी पार्टी की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। उमर की नागरिकता को लेकर गहराता विवाद अब मुलायम सिंह के गले की फांस बनता जा रहा है। उमर खान भारत के नागरिक हैं या पाकिस्तान के ये फैसला तो गृहमंत्रालय और चुनाव आयोग को करना होगा। लेकिन इस विवाद से समाजवादी पार्टी को नुकसान ज़रुर हो रहा है। फिलहाल इस बारे मे बात करने के लिये उमर खान उपलब्ध नहीं हैं। वो इस वक्त उमरे के लिये सऊदी अरब की य़ात्रा पर हैं। उनका ग़ैर मौजूदगी में उनके समर्थक पूरे मामले को दबाने की पुरज़ोर कोशिश में लगे हुये हैं।

Thursday, January 27, 2011

PSF Celerate Republic Day at NPS


In Saharanpur PARVEZ SAGAR FOUNDATION®Celebrate The Republic Day with poor street children in Namra Public School at Hasan Colony. This free school running by foundation from last two years in this area. PSF distributed sweets, fruits, toffees, & pinots to poor children and distribute the blanket to needy of slum area. On this occasion Mr. Mohd.Asgar, & comrade Mahaveer singh unfold the national flag. In this patriotic event Mr. Tanveer (Monu), Mr. Tabrez (Sonu), Mrs Trannum, Mrs Shahnaaz, Mohd Ali Adv., Praveen Kumar, Shaukat Ansari, Vijay Pal Singh, Master Gafoor, Chandrabhan Kashyap, Mehndi Hasan, Pankaj Kumar, Shakeel Ahmad and Ramesh Kumar etc was present. Secretary Mr. Tabrez (Sonu) gave thanks to all guest at the and of programme.

Friday, December 31, 2010

HAPPY NEW YEAR-2011


A Glorious year is waiting for you.

Walk with aims,

Run with confidence

& Fly with achievements.

Wish you & your family a Very

HAPPY NEW YEAR-2011

Saturday, November 20, 2010

पर्यटन के लिये बहुत कुछ है छत्तीसगढ़ में





































छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने हाल ही में राज्य की स्थापना के दस साल पूरे होने के उपलक्ष मे हमें छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिये आमन्त्रित किया। मैं और मेरे कुछ पत्रकार साथी चार दिन के लिये छत्तीसगढ़ गये। राजधानी रायपुर के माना एअरपोर्ट से सीधे होटल पंहुचे। उसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर डॉ.रमन सिंह से मुलाकात की। पहले दिन तो हम रायपुर मे ही रहे लकिन दूसरे दिन की अलसुबह हम रवाना हुये छत्तीसगढ़ के स्वर्ग यानि बस्तर के लिये। ये वही इलाका है जो सबसे ज़्यादा नक्सल प्रभावित माना जाता है। लगभग 325 किमी. का सफर हमने कार से साढे छः घण्टे मे पूरा किया। रास्ते मे कांकेर और कई अन्य ऐसे कई स्थान थे जो बेहद खूबसूरत थे खासकर दो घाटी जो हमे देहरादून और मसूरी की याद दिला रही थी। शाम को लगभग चार बजे हम तीरथगढ़ पंहुचें जहां का नज़ारा देख हमारी आँखे खुली रह गयी। हमारे सामने था एक शानदार दलप्रपात यानि वॉटरफॉल जिसे देख कर कोई वाह किये बिना नही रह सकता। हमे यहां करीब एक घण्टा रुके और खाना खाने के बाद वहां से चित्रकोट के लिये रवाना हुये। वहां पंहुचते पंहुचते रात हो गयी थी। यहां राज्य के लोक निर्माण विभाग ने शानदार गेस्ट हॉउस बनाया है जिसका निर्माण 2008 मे पूरा हुआ था। रातभर वहां आ रही एक आवाज़ हम सभी को बैचेन कर रही थी लेकिन सुबह जब आँख खुली तो जो नज़ारा कमरे से दिख रहा था वो सचमुच अदभुद था। गेस्टहॉउस के ठीक बगल मे मौजूद था एशिया के चुनिन्दा वॉटरफॉल मे से एक जलप्रपात जो इन्द्रावती नदी पर बना है। इसे देखकर तो हम सभी हैरान थे। आकार मे लगभग 400 मीटर चौड़ा और लगभग 100 मीटर ऊंचा ये वॉटरफॉल किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकता है। शान्ति से भरे माहौल के बीच सिर्फ इस वॉटरफॉल की आवाज़ सन्नाटे को दूर तक चीर रही थी। लग रहा था कि कुदरत ने अपनी खूबसूरती को यहां बड़े सलीके से सजाया है। समय कम था जिस वजह से हम लोग ज़्यादा जगह नही जा पाये लेकिन दो दिन मे जो छत्तीसगढ़ हमने देखा वो सचमुच काबिले तारीफ है। खासकर बस्तर का इलाका। मुझे ये कहने में कोई हिचक नही है कि अगर नक्सल का नासूर यहां ना हो तो पर्यटन की नज़र से ये इलाका सोने के अण्डे देने वाली मुर्गी साबित हो सकता है। हर तरफ कुदरत ने अपना कमाल दिखाया है। हम मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होने ने हमें ये नजारे देखने का मौका दिया। मैं उम्मीद करता हूँ कि मुख्यमंत्री की जो कोशिशें नक्सल के खिलाफ चल रही हैं वो एक दिन ज़रुर कामयाब होगीं और छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिहाज़ से देश का एक जाना-माना राज्य बन जायेगा। छत्तीसगढ़ यात्रा की कुछ चुनिन्दा तस्वीरें यहां डाल रहा हूँ उम्मीद है आपको पसन्द आयेगीं।

Friday, October 1, 2010

शुक्रिया सहारनपुर...

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का एक ऐसा ज़िला है जो वुड़ कार्विंग के लिये पूरी दुनिया मे जाना जाता है साथ ही मज़बूत साम्प्रदायिक सौर्हाद और कल्चर के लिये भी ये शहर देशभर मे अपनी अलग पहचान रखता है। इस शहर के पानी मे ही संस्कृति, एकता और तहज़ीब का असर बसा हुआ है। देश मे ऐसे कई लोग हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों मे महारत हासिल कर सहारनपुर का नाम रोशन कर रहे हैं। शहर के लोग भी उन्हे इज़्जत देने में पीछे नही हैं। अपने बीच से बाहर जाकर नाम कमाने वाले यहां किसी सैलीब्रिटी से कम नही हैं। शहर मे कई ऐसी संस्थाऐं है जो अपने शहर का नाम रोशन करने वाले लोगों को समय-समय पर सम्मानित करती रही हैं। बात रंगमंच की हो या साहित्य की या फिर पत्रकारिता की, हर क्षेत्र मे काम रहे शहरवासियों को सहारनपुर के अदब पसन्द लोगों ने हमेशा इज़्ज़त बख्शी। साहित्य, उर्दू अदब और सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रख्यात संस्था एच.मकबूल मेमोरीयल सोसाइटी और अंजुमन ज़िन्दा दिलाने सहारनपुर ने सामुहिक रुप से बुधवार की शाम स्वामी रामतीर्थ केन्द्र मे एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर मेरे शहर ने मेरे काम की हौंसला अफज़ाई की और शहर के गणमान्य लोगों की मौजूदगी मे मुझे इस साल के मकबूल मेमोरीयल अवार्ड से सम्मानित किया। मेरे लिये इस अवार्ड़ की अहमीयत साल 2008 मे मुझे दिये गये नेशनल अवार्ड़ से भी ज़्यादा है क्योंकि इस अवार्ड़ मे मेरे शहर की खुश्बु और मेरे शहर का प्यार बसा हुआ है। मैं उन चन्द लोगों मे शामिल हूँ जिन्हे सहारनपुर ने इतना प्यार और इज़्ज़त दी। मैं शुक्रिया करना चाहता हूँ दोनो संस्थाओं का और खासकर मेरे अजीज़ बड़े भाई जनाब शब्बीर शाद और जनाब राव महबूब साहब का जिन्होने मेरा नाम इस अवार्ड़ के लिये चुना। एक बार फिर सहारनपुर की तहज़ीब, अदब और अपने परिवार का शुक्रिया करना चाहूँगा जिसने मुझे इस काबिल बनाया। मैं दुआ करता हूँ कि मुझे मेरे शहर का प्यार हमेशा यूँ ही मिलता रहेगा और सहारनपुर हमेशा मेरी हौंसला अफज़ाई करता रहेगा। आप सभी का शुक्रिया।

Tuesday, August 24, 2010

सीएम रमन सिंह, आड़वाणी और आमिर लाइव...

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ड़ॉ.रमन सिंह तीन दिन के लिये दिल्ली दौरे पर आये थे। अपने अतिव्यस्त समय के बावजूद आखिर उन्होने भी आमिर खान की फिल्म पीपली लाइव देखने के लिये बीते गुरुवार यानि 19 अगस्त की रात समय निकाल ही लिया और वो भी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आड़वाणी के साथ। और खुद आमिर खान ने इस मौके को दिल्ली आकर यादगार बना दिया। जी हां इस मौके पर वो खुद पीवीआर पंहुचे और इन खास मेहमानों के साथ फिल्म भी देखी। क्नॉट पैलेस के एक पीवीआर मे इन अतिविशिष्ट दर्शकों के लिये खास इन्तज़ाम किये गये थे। फिल्म का ये शो आम दर्शकों के लिये नही था। सुरक्षा के लिहाज़ से भी कड़े इन्तज़ाम किये गये थे। फिल्म सभी को पसन्द आयी और आती भी क्यों ना भई खुद आमिर जो साथ थे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तो फिल्म देखने के बाद खासे खुश दिखाई दिये। इन सभी खास मेहमानों ने फिल्म की खूब तारीफ की। और सबसे कमाल की बात ये कि किसी भी मीड़िया वाले को इसकी भनक तक नही लगी। फिर भी एक तस्वीर आपके लिये यहां डाल रहा हूँ उम्मीद है आपको पसन्द आयेगी।

Saturday, August 7, 2010

Faith, Trust & Hope

Three Nice Stories-

01. Once, All Villagers decided to pray for rain. On the day of prayer all people gathered and only one boy came with an Umbrella….

THAT’S FAITH


02. Example of the feeling of a one year old baby, when you throws him in air he laughs because he knows you will catch him….

THAT’S TRUST


03. Every night we go to bed, we have no assurance that we would wake up alive the next morning. But still we keep alarm for the next day….

THAT’S HOPE

Means Life is all about these three things. Enjoy your Life.

Tuesday, July 20, 2010

Please reduce long time calls

1 Egg
2 Mobiles
65 minutes of connection between mobiles.
We assembled something as per image.
Initiated the call between the two mobiles and allowed 65 minutes approximately...
During the first 15 minutes nothing happened;
25 minutes later the egg started getting hot;
45 minutes later the egg is hot;
65 minutes later the egg is cooked.
Conclusion: The immediate radiation of the mobiles has the potential to modify the proteins of the egg. Imagine what it can do with the proteins of your brains when you do long calls.
Please try to reduce long time calls on mobile phones and pass this message to all your friends you care for.

Thursday, July 1, 2010

मुद्दा क्या है- नक्सल या कश्मीर ?

हाल ही मे देश के दो राज्यों मे हुये दो बड़े हादसे शायद महंगाई के मुद्दे पर चौतरफा घिरी केन्द्र सरकार के लिये वरदान जैसे लग रहें हैं। कश्मीर मे जहां अलगवादी ताकतों के सर उठाने की बात सामने आयी है वहीं नक्सलियों ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर मे हमला करके सीआरपीएफ के 27 जवानों को मौत की नींद सुला दिया। ये दोनों हादसे ऐसे वक्त पर हुये है जब केन्द्र सरकार महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। देश के कोने कोने मे सरकार के खिलाफ आवाजें उठ रही थी। लेकिन अचानक कश्मीर के सोपोर और छत्तीसगढ़ के नारायणपुर मे हुये हमले ने सरकार और विपक्ष का ध्यान बंटा दिया। मुद्दों की अगर बात करें तो विपक्ष और सरकार के बीच इस पर बयानबाज़ी चलती रहती है। रही बात देश की जनता की तो वो कुछ दिन चिल्लाती है और फिर हमेशा की तरह शान्त होकर महंगाई का बोझ अपने कंधों पर ढोती है।
इस पर भी गज़ब की बात ये है कि देश के गृहमंत्री पी.चिदाम्बरम मीड़िया से रु-ब-रु हुये। उनको ना तो मंहगाई से कोई मतलब था और ना ही छत्तीसगढ़ में शहीद हुये जवानों से। उन्हे तो केवल कश्मीर दिख रहा था। उनका सारा फोकस केवल कश्मीर पर रहा। जब बात छत्तीसगढ़ की बात आयी तो उन्होने घटना की जानकारी देकर इतीश्री कर ली। जबकि सारा घटनाक्रम तो पहले ही मीड़िया और देश की जनता को पता था। जब-जब उनसे नक्सल समस्या के बारे मे सवाल पूछे गये गृहमंत्री जी घूम-फिर कर कश्मीर पर जा पंहुचे। कमाल की बात ये थी कि सारी मीड़िया इस प्रेस वार्ता के लिये इसलिये उत्सुक थी कि शायद छत्तीसगढ़ के नारायणपुर मे हुये नक्सली हमले पर सरकार कुछ संदेश देना चाहती है। लेकिन यहां तो सब उल्टा हो गया। गृहमंत्री ने कश्मीर मे हो रही घटनाओं को हाईलाईट करते हुये सोपोर मे आतंकी संगठन लश्कर के सक्रीय होने की बात कह कर बड़ी ख़बर तो दे दी लेकिन छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले पर उन्होने ये कह दिया कि वो इस बात की जांच कराऐंगे कि क्या कहीं इसमे चूक हुई है। यहां इन सब बातों को कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि इन सबके पीछे कहीं ना कहीं सियासत का रंग दिखाई दे रहा है। कश्मीर में होने वाली कोई भी घटना सरकार के लिये बड़ी होती है। लेकिन छत्तीसगढ़ मे होने वाली घटनाऐं जांच और बैठकों तक ही सीमित क्यों हो जाती हैं? इसका जवाब तो शायद गृहमंत्री के पास भी नही है। छत्तीसगढ़ की जनता और सरकार तो सिर्फ इस समस्या से निजात चाहती है। लेकिन इस वक्त केवल कश्मीर का मामला केन्द्र के लिये ज़्यादा ज़रुरी दिख रहा है क्योंकि सियासीतौर पर नक्सल और महंगाई से बड़ा मद्दा शायद कश्मीर और लश्कर ही है।