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Saturday, February 25, 2012

जयसवाल साहब ये क्या कह दिया आपने?

केन्द्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने आखिरकार ये मान ही लिया कि उनकी सरकार में भी भ्रष्टाचार है। आगरा में व्यापारियों की एक सभा में वो भ्रष्टाचार पर बोल रहे थे। उन्होने मंच से कहा कि "मैं भ्रष्टाचार से इनकार नही करता। केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में भी भ्रष्टाचार है। मैं ये नही कहता कि वहां सब सदाचार है।" लेकिन फिर भी जयसवाल यूपी की सरकार पर धावा बोलने से नही चूके उन्होने मायावती पर प्रयोजित भ्रष्टाचार कराने का आरोप लगाया।
जयसवाल साहब ये क्या कह दिया आपने?
जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों के घरों पर पत्थर नही फेंका करते।

Wednesday, February 8, 2012

कहां चली गयी इंसानियत ?

आगरा में मंगलवार को दक्षिण भारत को जाने वाले रेलवे ट्रेक पर ना जाने कब लाइने पार करते हुये अधेड़ उम्र का एक इंसान किसी ट्रेन की चपेट में आ गया। उसके दोनों पांव कट गये। वो वहां एक घंटे तक पड़ा हुआ तड़पता रहा और आस-पास के लोग खड़े तमाशा देखते रहे। किसी को उस लाचार पर रहम नही आया। थोड़ी देर बाद एक और ट्रेन तेज़ी से ट्रेक के बीच पड़े उस इन्सान के ऊपर से गुज़र गयी। उसके सर में भी चोट थी। वो तड़पता रहा लोग देखते रहे। एक कैमरामेन ने वहां खड़े होकर उसकी exclusive फुटेज तो बनाई लेकिन उसे वहां से हटाने और उसकी ज़िन्दगी बचाने के लिये कुछ नही किया। ना जाने कैसे बाद में किसी का दिल पसीजा और उस इंसान को उठा कर ट्रेक के बाहर लेटा दिया। कानून की रखवाली करने वाली पुलिस भी सवा घंटे बाद आयी। अस्पताल जाकर वो अधेड़ अज्ञात आदमी ज़िन्दगी की जंग हार गया। तभी से मेरा दिल मुझे कचोट रहा है पूछ रहा है कि आखिर हम इतने संवेदनहीन क्यों हो गये हैं? मैं पूछना चाहता हूँ उन तमाशा देखने वालों से आखिर कहां चली गयी उनकी इंसानियत? काश वो लोग इंसान होते तो शायद वो इंसान अभी ज़िन्दा होता।

Monday, November 9, 2009

महंगाई को लेकर बवाल

मौहब्बत का शहर का आगरा आज दिन भर दहला रहा। बढती महंगाई के विरोध को लेकर शहर मे जो चिन्गारी दो दिन पहले भड़की थी। आज वो शोला बन गयी। शुरुआत शहर के जीवनी मण्डी चौराहे से हुई जहां स्थानीय लोगों महंगाई का विरोध जताने के लिये सड़को पर उतर आये। जाम लगा दिया गया। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो भीड़ ने उग्र होकर पथराव शुरु कर दिया। वाहनों मे आग लगा दी गयी। पुलिस को मजबूर होकर फायरिंग करनी पड़ी। भगदड़ और फायरिंग मे दर्जनों लोग जख्मी हो गये। दूसरी तरफ खन्दारी चौराहे पर हाइवे को महिलाओं ने जाम कर दिया। उनका हौंसला बढाने के लिये भाजपा के कार्यकर्ता भी आ गये। यहां भी हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लॉठीचार्ज करना पड़ा। दोनों जगह घण्टो तनाव की स्थिति बनी रही। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। लेकिन एक सवाल मेरे सामने है कि क्या ये विरोध यहीं खत्म हो जायेगा? मुझे लगता है कि ये शुरुआत है आज आगरा है तो कल दिल्ली के लोग भी महंगाई का विरोध करने को सड़कों पर आ सकते हैं... और परसों लखनऊ के। इसके पीछे बढती कीमतों पर सरकार का नियंत्रण खोना ही सबसे बड़ी वजह मुझे नजर आती है। विरोध करने वालों को तो गोली और लॉठी से रोका जा सकता है लेकिन उनके विचारों को मार पाना किसी सरकार के बस मे नही है। महंगाई का विरोध भी एक विचार बन गया है। और ये फैल रहा है जब लोग आगरा मे हुये बवाल की ख़बर देख या पढ रहें होगें तो ये विचार खुद-ब-खुद उनके मन मे आ सकता है। कहने का मतलब है कि ताकत का इस्तेमाल कर विरोध या लोगों को रोका जा सकता है। लेकिन परेशानी से उबरे मानसिक विरोध और विचार को रोकने का तरीका केवल एक है वो है कीमतों पर काबू पाना। कितनी मज़ाकिया बात लगती है रोज़ ये ख़बर पढना की महंगाई की दर कम हो रही है लेकिन हकीकत बिल्कुल उसके उलट है। दाल, सब्ज़ी और घरेलू ज़रुरत के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं कीमते आम आदमी की हद से बाहर हो रही है। तो लोग क्या करें? किस से कहें? कहीं सुनवाई नही होती तो नतीजा ऐसे हिंसक विरोध के रुप मे सामने आता है। ज़रुरत इस बात की है कि सरकार इस बात पर ध्यान दे और महंगाई को कम करने की दवा ढूंढे। नही तो ये आग आगरा ही पूरे देश मे फैल जायेगी।