Tuesday, June 18, 2013
Thursday, May 23, 2013
यूपी में सरकार की छवि बिगाड़ रहे हैं कुछ पुलिस वाले
यूपी के युवा और काबिल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रात-दिन एक करके सरकार और पार्टी की छवि बेहतर बनाने के लिये काम कर रहे हैं। उसके बावजूद सरकार और पार्टी में ही कई लोग ऐसे हैं जिनकी वजह से प्रदेश में लगातार कानून व्यवस्था का संकट बना हुआ है। ऊपर से प्रदेश की खाकी यानि उत्तर प्रदेश पुलिस भी सरकार की छवि खराब करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रही है। इसका ताज़ा उदहारण मंगलवार को आगरा में देखने को मिला।
वाक्या दोपहर का है, आये दिन की तरह एनएच-2 के वाटर वर्क्स चौराहे से लेकर सुल्तानगंज की पुलिया तक लम्बा जाम लगा हुआ था। लेकिन वाटर वर्क्स चौराहे पर तैनात यातायात पुलिस के दरोगा आरसी यादव अपने एक चहेते होमगार्ड खान के साथ वसूली में लगे हुये थे। जाम की वजह से लोग गर्मी में बिलख रहे थे लेकिन इन्होने जाम खुलवाने के बजाय अपना ज़रुरी काम जारी रखा। इसी बीच जाम में फंसे पी7 न्यूज़ चैनल के स्टॉफ रिर्पोटर यशपाल सिंह किसी तरह से पुलिस बूथ के पास तक पंहुचे। जैसे ही उन्होने अपनी मोटरसाइकिल वहां रोकी तो दरोगा यादव के कहने पर होमगार्ड़ खान ने बिना कुछ कहे सुने उनकी बाइक की चाबी निकाल ली। यशपाल वहां उन्हे जाम के बारे में बताने गये थे उल्टा दरोगा जी ने परिचय देने के बावजूद उनके साथ अभद्रता शुरु कर दी यही नही उन्होने पत्रकार यशपाल को पीटना शुरु कर दिया। इसी दौरान यशपाल ने किसी तरह से अन्य पत्रकारों को फोन कर दिया। इस बात से दरोगा और आग बबूला हो गया और गाली गलौच करते हुये यशपाल को मारने के लिये डंडा ले आया। तभी शहर के तीन-चार पत्रकार वहां पंहुच गये और यशपाल को वहां से बचाकर पूरे मामले की जानकारी एसएसपी सुभाष चंद दुबे को दी। मामले को गंभीरता से लेते हुये एसएसपी ने आरोपी दरोगा को निलम्बित तो कर दिया लेकिन उसके खिलाफ पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज ना करके सिर्फ एनसीआर दर्ज कर खाना-पूर्ति कर दी। मामले से आगरा के पत्रकारों में खासा रोष है। लेकिन एसएसपी के आश्वासन पर यशपाल ने फिलहाल कोई कदम ना उठाने का निर्णय लिया है।
इस घटना के विरोध में मैने खुद भी पुलिस के आला अधिकारियों से बात की है। लेकिन आये दिन इस तरह की घटनाऐं उत्तर प्रदेश में आम हो रही हैं। जिनकी वजह से पत्रकार प्रदेश में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के दावे और सरकार के वादे केवल बेमानी नज़र आ रहे हैं। अगर जल्द ही ऐसी घटनाओं पर रोक नही लगी तो इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। मैं और मेरे सभी पत्रकार साथी इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं।
-परवेज़ सागर
वाक्या दोपहर का है, आये दिन की तरह एनएच-2 के वाटर वर्क्स चौराहे से लेकर सुल्तानगंज की पुलिया तक लम्बा जाम लगा हुआ था। लेकिन वाटर वर्क्स चौराहे पर तैनात यातायात पुलिस के दरोगा आरसी यादव अपने एक चहेते होमगार्ड खान के साथ वसूली में लगे हुये थे। जाम की वजह से लोग गर्मी में बिलख रहे थे लेकिन इन्होने जाम खुलवाने के बजाय अपना ज़रुरी काम जारी रखा। इसी बीच जाम में फंसे पी7 न्यूज़ चैनल के स्टॉफ रिर्पोटर यशपाल सिंह किसी तरह से पुलिस बूथ के पास तक पंहुचे। जैसे ही उन्होने अपनी मोटरसाइकिल वहां रोकी तो दरोगा यादव के कहने पर होमगार्ड़ खान ने बिना कुछ कहे सुने उनकी बाइक की चाबी निकाल ली। यशपाल वहां उन्हे जाम के बारे में बताने गये थे उल्टा दरोगा जी ने परिचय देने के बावजूद उनके साथ अभद्रता शुरु कर दी यही नही उन्होने पत्रकार यशपाल को पीटना शुरु कर दिया। इसी दौरान यशपाल ने किसी तरह से अन्य पत्रकारों को फोन कर दिया। इस बात से दरोगा और आग बबूला हो गया और गाली गलौच करते हुये यशपाल को मारने के लिये डंडा ले आया। तभी शहर के तीन-चार पत्रकार वहां पंहुच गये और यशपाल को वहां से बचाकर पूरे मामले की जानकारी एसएसपी सुभाष चंद दुबे को दी। मामले को गंभीरता से लेते हुये एसएसपी ने आरोपी दरोगा को निलम्बित तो कर दिया लेकिन उसके खिलाफ पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज ना करके सिर्फ एनसीआर दर्ज कर खाना-पूर्ति कर दी। मामले से आगरा के पत्रकारों में खासा रोष है। लेकिन एसएसपी के आश्वासन पर यशपाल ने फिलहाल कोई कदम ना उठाने का निर्णय लिया है।
इस घटना के विरोध में मैने खुद भी पुलिस के आला अधिकारियों से बात की है। लेकिन आये दिन इस तरह की घटनाऐं उत्तर प्रदेश में आम हो रही हैं। जिनकी वजह से पत्रकार प्रदेश में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के दावे और सरकार के वादे केवल बेमानी नज़र आ रहे हैं। अगर जल्द ही ऐसी घटनाओं पर रोक नही लगी तो इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। मैं और मेरे सभी पत्रकार साथी इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं।
-परवेज़ सागर
Thursday, April 25, 2013
कबाड़ से निकल रहा है मौत का सामान
आगरा के गौबरचौकी इलाके में एक कबाड़ के गोदाम में हुये भीषण धमाके ने पूरे
शहर को दहला दिया। इस हादसे में दो लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ये इलाका
ताजमहल से करीब दो किमी. दूर है। यहां एक कबाड़ी रामनिवास अपने गोदाम में
रॉकेटनुमा धातु को तोड़ने की कोशिश कर रहा था तभी अचानक ये हादसा हो गया। ठीक उसी
वक्त उस गोदाम के बाहर से निकल रहा छोटू भी इस धमाके का शिकार हो गया और उसकी भी
मौके पर ही मौत हो गयी। एक व्यक्ति गंभीर अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल
रहा है। पुलिस का कहना है कि कबाड़ में सेना के चांदमारी क्षेत्र से आया कोई ऐसा
हथियार या रॉकेट था जो अभ्यास के दौरान नही चला। कबाड़ी उसे धातु समझकर तोड़ने की
कोशिश कर रहा था जिसकी वजह से उसे और एक बेकसूर को अपनी जान गवानी पड़ी।
इस तरह की घटनाऐं उन शहरों में अक्सर देखने को मिलती
हैं जहां बड़े छावनी क्षेत्र और सेना के अभ्यास क्षेत्र हैं। सेना के चांदमारी
इलाकों के आस-पास रहने वाले ग़रीब लोग अक्सर पैसे के लालच में सेना अभ्यास में
इस्तेमाल हुये गोला-बारुद से निकली धातु को ले जाकर कबाड़ियों को बेच देते हैं।
इसी धातु के चक्कर में कई बार ये लोग ज़िंदा बम और रॉकेट भी उठा ले आते हैं। जिसकी
वजह से इस तरह के हादसे होते हैं। देश की राजधानी समेत कई बड़े शहरों में ज़िंदा
बम और रॉकेट कई लोगों की मौत का सबब साबित हुये हैं।
इस तरह के जानलेवा हादसों के पीछे मुझे सेना की
लापरवाही नज़र आती है। नियम के मुताबिक सेना के अभ्यास क्षेत्रों या चांदमारी इलाकों
में बाहरी लोगों को प्रवेश वर्जित होता है। इसके लिये सेना की निगरानी चौकियां भी
बनी होती हैं। लेकिन उसके बावजूद कैसे लोग सेना क्षेत्र में घुसकर मौत का सामान ले
आते हैं ? ये एक बड़ा सवाल है। अगर सेना अपने अभ्यास
क्षेत्रों में चौकसी बरते और अभ्यास क्षेत्र में बिखरे पड़े इस तरह के सामान की
जांच कर ले। या उनके निस्तारण के वक्त सावधानी बरते तो इस तरह के हादसे रुक सकते
हैं। वरना इसी तरह चंद रुपयों के लालच में लोग अपनी जान के साथ-साथ दूसरे लोगों की
जाम भी खतरे में डालते रहेंगे।
-
परवेज़ सागर
Friday, April 5, 2013
Get well soon Deepak ji

एम्स में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया की हालत में आपरेशन के बाद तेजी से सुधार हो रहा है. उम्मीद की जा रही है कि एम्स के डाक्टर महज़ चार दिन में ही दीपक जी को अस्पताल से छुट्टी दे देंगे। कूल्हे की हड्डी में हेयरलाइन फ्रैक्चर के कारण उन्हें तकरीबन छह सात हफ्ते बेड पर पड़े रहना पड़ सकता है था लेकिन ऑपरेशन के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया। गौरतलब है कि दीपक जी इंदौर एयरपोर्ट पर गंभीर रुप से घायल हो गये थे और उन्हे एअर एम्बुलेंस से दिल्ली के एम्स ले जाया गया था। हम सभी उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
Friday, March 22, 2013
कमाल पर हमला शर्मनाक
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एनडीटीवी के दफ्तर में घुसकर कुछ लोगों ने हमारे साथी और
वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान पर आतंकियों से सम्बंध बताते हुये हमला बोल दिया जो कि
अपने आप में बड़ी शर्मनाक घटना है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार भी
किया है जो अपने आप को हिंदू महासभा का अध्यक्ष बता रहा है। आरोपी का नाम कमलेश
है जो अपने दर्जनभर साथियों के साथ एनडीटीवी के दफ्तर पहुंचा और गार्ड के रोकने पर
भी ऑफिस में घुस गया इससे पहले उसने अपने साथियों के साथ मिलकर गार्ड़ के साथ मारपीट
की। बाद में वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान से बदसलूकी और हाथा-पाई की। इस मामले में
हालाकि कमाल ने पुलिस को शिकायत दर्ज करा दी है। जिसके बाद पुलिस ने मामूली धाराओं
में मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। मैं और मेरे सभी पत्रकार साथी इस घटना की कड़ी
निंदा करते हैं। और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस तरह के मामलों में सख्त कदम उठाये
जाने की मांग करते हैं। ताकि हम अपना काम निष्पक्ष और निडरता से कर सकें।
Saturday, March 2, 2013
हमेशा ऐसा क्यों नही रहता लाल किला
आगरा में चल रहे ताज महोत्सव में भले ही इस साल कुछ नयापन नही था। लेकिन अभी तक महोत्सव के दौरान हुये दो आयोजन खास रहे। इनमें एक था वड़ाली ब्रदर्स नाईट और दूसरा आगरा किला में आयोजित किया गया शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम जिसमें उस्ताद शाहिद परवेज़ का सितार वादन और 105 साल के पदम् भूषण उस्ताद रशीद खाँ की बंदिशे खास थी। हालाकि हमेशा की तरह विभागीय लापरवाही से इन दोनों कार्यक्रमों में श्रोताओं की संख्या कुछ खास नही थी। लेकिन 25 फरवरी की रात आगरा किले के दिवान-ए-आम में आयोजित शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में किले का नज़ारा एक दम बदला हुआ नज़र आया। किले के अन्दरुनी हिस्सों को सजाने के लिये लाइट्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया। खूबसूरत कैंडिल लाइट्स भी कम नही थी। उस पर उस्ताद शाहिद परवेज़ और उस्ताद रशीद खान के सुरों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। इस नज़ारे को देखने वाले भले ही कम थे लेकिन ये सच में लाजवाब था। यहां कुछ लोगों ने कहा भी कि अगर यहां ऐसा हमेशा किया जाये तो लालकिला आगरा में रात्रि पर्यटन का खास केन्द्र बन सकता है। भले ही ये बात एएसआई और सरकारी महकमों की समझ में ना आये लेकिन ये सच है। यहां कुछ तस्वीरे आप लोगों के लिये डाल रहा हूँ उम्मीद है कि आपको पसंद आयेंगी, वैसे आप भी देखकर बतायें।Monday, December 24, 2012
पत्रकारों पर हमला... शर्मनाक
रविवार का दिन पत्रकारों के लिये परेशानी भरा रहा।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पत्रकारों को भी नही बख्शा हमारे कई पत्रकार साथी गंभीर रुप से घायल हो गये। इस घटना के बाद भले ही दिल्ली पुलिस मीडिया के सवालों से बच रही है। लेकिन पुलिस का जो बर्ताव देखने को मिला वो बहुत ही शर्मनाक था। दिल्ली गैंग रेप मामले के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर था। हज़ारों युवा अपने गुस्से का इज़हार करने के लिये रविवार को भी रायसीना हिल्स और संसद की तरफ जाना चाहते थे। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल थी। लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उन्हे रोक लिया। पुलिस ने पहले वॉटरकैनन का प्रयोग किया और बाद में लाठीचार्ज कर दिया। पुलिसवालों ने महिलाओं और युवतियों को भी नही बख्शा। जब हमारे मीडिया के कुछ साथी दिल्ली पुलिस की इस करतूत को कैमरे में कैद कर रहे थे। तो पुलिस वालों ने उन्हे भी अपना निशाना बना लिया। कई पत्रकार साथियों का चोट आयीं हैं। और कैमरे भी क्षतिग्रस्त हो गये। पुलिस की इस हरकत पर कोई कुछ कहने को तैयार नही। हालात इतनी बुरी हो गयी कि दिल्ली की मुख्यमंत्री के पुत्र और कांग्रेस सांसद संदीप ने खुद अपनी ही पार्टी की सरकार से दिल्ली के पुलिस कमीश्नर को हटाने की मांग कर डाली। इस घटना से पत्रकारों में रोष है।
उधर, रविवार को ही उत्तराखंड़ की राजधानी देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज़ वाइरस समाचार समूह के सम्पादक सलीम सैफी परिवार समेत बाल बाल बच गये। किसी ने साजिशन उनकी सेन्ट्रों कार में आग लगा दी। ये हादसा तब हुआ जब सलीम सैफी अपने परिवार के साथ बाज़ार आये हुये थे। उन्होने अपनी कार पार्किंग में खड़ी की थी। जब वो लौटकर आये तो उन्हे पेट्रोल की गंध आयी लेकिन बाहर कुछ नही था जैसे ही उन्होने अपनी कार स्टार्ट की तभी कार में आग लग गयी। सलीम सैफी ने उनकी पत्नी और दोनों बच्चों को फुर्ती के साथ कार से बाहर निकाला और कार कुछ पल में ही धूं-धूं कर जल उठी। राहत की बात ये है कि इस हादसे में सलीम सैफी और उनका परिवार बाल-बाल बच गये। इस हादसे को वरिष्ठ पत्रकार सलीम सैफी के खिलाफ एक बड़ी साजिश माना जा रहा है। उत्तराखंड़ में उनके कई विरोधी हैं। जिनको इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है। इस हादसे से साफ हो गया है कि सलीम सैफी देहरादून में सुरक्षित नही हैं।मैं इन दोनों घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। और अपने सभी पत्रकार साथियों से अपील करता हूँ कि सभी एक मंच पर आकर इन घटनाओं की निंदा करें। ताकि हम सुरक्षा की भावना के साथ अपना काम कर सकें और सही ख़बर और सच जनता तक पहुंचाते रहें।-परवेज़ सागरWednesday, December 19, 2012
बलात्कारियों को मिले मौत की सज़ा...
दिल्ली गैंग रैप मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। घटना देश की राजधानी
में हुई तो ये मामला सुर्खियों में आ गया। लेकिन इस तरह की घटनाऐं उत्तर प्रदेश
समेत कई उत्तर भारत में रोज़ाना हो रही
हैं। जो समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और घटती मर्यादा का प्रतीक है। लेकिन अफसोस की
बात ये है कि इस तरह की घटनाऐं जब छोटे शहरों में होती हैं तो हमारी मीडिया और पुलिस
दोनों ही इन्हे हल्के में लेते हैं। जब हम ऐसी घटना की जानकारी अपने समाचार चैनल
के मुख्यालय पर देते हैं तो हमसे पीड़ित महिला या बच्ची का प्रोफाइल पूछा जाता है।
पीड़िता अगर सम्पन्न परिवार की हो तो हमें स्टोरी करके भेजने के लिये कहा जाता है
लेकिन अगर पीड़िता ग़रीब या लो-प्रोफाइल की हो तो स्क्रोल तक सिमट जाती है। यही
हाल पुलिस का है मामला अगर हाई-प्रोफाइल हो तो पुलिस एक्टिव नज़र आती है। और अगर
पीड़िता लो-प्रोफाइल है तो पुलिस भी खानापूर्ति कर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर लेती
है। और अब तो हद हो गयी है बलात्कार की शिकार महिलाओं को उनकी जाति के नाम से भी
प्रचारित किया जाने लगा है। ख़बरों की सुर्खियों में भी इसका असर होने लगा है। कई
समाचार चैनल और अखबार ‘दलित महिला से बलात्कार’ जैसे वाक्य लिखने में
गुरेज़ नही करते हैं। अफसोस की बात है कि यहां पर भी जाति और धर्म देखा जाने लगा
है।
नेशलन क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की माने तो भारत में रोज़ाना 72
महिलाओं के साथ रैप हो रहा है। और सबसे देश के सबसे सुरक्षित प्रदेश दिल्ली में ये
औसत इस से ज्यादा है। अब पूरे देश में बलात्कारियों को मौत की सज़ा दिये जाने की मांग
ज़ोर पकड़ रही है। वाकई बलात्कार और बाल यौन शौषण जैसे जघन्य अपराध में शामिल लोगों
के लिये इसी तरह की कड़ी सज़ा का प्रावधान होना चाहिये। और बलात्कार या यौन शोषण
की शिकार महिला, लड़की या बच्ची को जाति और धर्म के आधार पर नही बल्कि पीड़िता के
आधार पर ही देखा जाना चाहिये।
हम सभी को इस जघन्य अपराध के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाने की ज़रुरत है वरना
आने वाले दिनों में घर से बाहर निकलने वाले महिला या स्कूल जाने वाली हमारी
बच्चियां भी सुरक्षित नही रहेंगी। ऐसे बलात्कारियों के खिलाफ मौत की सज़ा का
प्रावधान और यौन शौषण में शामिल लोगों को कड़ी सज़ा की मांग मुझे जायज़ नज़र आती
है। हम सभी को मिलकर इस मांग को मजबूती देनी चाहिये ताकि सरकार ऐसे कानून पर विचार
करे। और महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिये
ठोस कदम उठाये जायें।
-परवेज़ सागर
Friday, November 2, 2012
पर्दाफाश तूफान से नेता परेशान
अमरीका में 'सैंड़ी' और भारत में अरविंद केजरीवाल कोहराम मचा रहे हैं। अमरीका में जानलेवा तूफान से कोई बड़ा नुकसान हो या ना हो लेकिन भारत में अरविंद के पर्दाफाश तूफान से कई बड़े नेताओं की साख पर सवाल उठ खड़े हैं। कई लोगों का मानना है कि अरविंद के खुलासों की तेज़ी देखकर लगता है कि वाकई ये कमाल है का काम कर रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नही है जो इसे महज़ पब्लिसिटी स्टंट करार दे रहे हैं। लोगों का क्या है वो तो कहते रहेंगे लेकिन ज़रा उन नेताओं की सोचिये जो खुलासों के बाद सफाई देने या खुद को बचाने की कोशिश में लगें हैं और जो बच गये हैं वो इस लिये परेशान हैं कि अगला नम्बर कहीं उनका तो नही। परेशानी की वजह जायज़ भी है क्योंकि ये सारे राजनीति के इस हमाम में नंगे जो हैं।
Thursday, September 13, 2012
क्या सुरक्षित है यमुना एक्सप्रैस-वे ?
यमुना एक्सप्रैस-वे पर सफर करने की चाह रखने वालों के लिये ये बुरी ख़बर हो सकती है। लोग दो घंटे में दिल्ली पंहुचने की चाह में सबसे ज़्यादा टोल टैक्स देकर नोएडा-आगरा यमुना एक्सप्रैस-वे पर जा रहे हैं। लेकिन आये दिन वहां होने वाले किसान आंदोलन यात्रियों के लिये परेशानी का सबब बन रहे हैं। किसान कभी भी कहीं भी आकर एक्सप्रैस-वे पर धरना देने बैठ जाते हैं। जिसकी वजह से इस अंर्तराष्ट्रीय स्तर के मार्ग पर सफर करने वाले घंटों के जाम में फंस कर रह जाते हैं। यहां हालात भी ऐसे हैं कि पुलिस को यहां पंहुचने में घंटों लग जाते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ये एक्सप्रैस-वे फिलहाल सुरक्षित नही है। ना तो इस पर पुलिस चौकी ही बनी हैं और ना ही सीसीटीवी काम कर रहे हैं। सबसे अहम बात ये कि इस एक्सप्रैस-वे पर टोल प्लाज़ा को छोड़कर कहीं भी लाइट का इंतज़ाम नही है। ऐसे में इसकी सुरक्षा का अंदाज़ा लगा पाना कोई मुश्किल काम नही है।
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