Saturday, June 19, 2010

The Whole World is waiting for 21st of June

21st June - the Whole World is waiting for.........
Star Aderoid will be the brightest in the sky, starting 10 June. It will look as large as the sun from naked eye. This will culminate on 21stjune when the star comes within 34.65M miles of the earth. Be sure to watch the sky on june. 21 at 12:30 pm. It will look like the earth has 2 suns.!! The next time Aderoid may come this close is in 2287.

Tuesday, June 15, 2010

यूपी पुलिस- हम नही सुधरेंगें, जय हिन्द

हमारे देश के पर्यटन स्थलों पर लाखों की संख्या मे पर्यटक आते हैं और देश में पर्यटन का सबसे बड़ा केन्द्र होता है आगरा, जहां दुनियाभर के लोग बेपनाह मोहब्बत की अनमोल निशानी ताजमहल का दीदार करते हैं। आगरा शहर को अगर देश में पर्यटन की राजधानी कहा जाये तो कुछ ग़लत नही होगा। क्योंकि हर साल सबसे ज़्यादा पर्यटक इसी शहर में आते हैं।
हमारे देश की रवायत है कि मेहमान भगवान के समान होता है। इसीलिये यहां कहा भी जाता है “अतिथि देवोः भवः”। लेकिन आये दिन पर्यटकों और खासकर विदेशी मेहमानों के साथ कोई ना कोई हादसा होने की ख़बरें आती रहती हैं। आगरा में पर्यटकों के साथ होने वाले हादसों की भी एक लम्बी फेहरिस्त है। इन सब हादसों के पीछे सबसे बड़ा सबब है पुलिस की लापरवाही या फिर कहीये कि पैसे के लालच मे की गयी लापरवाही। शहर मे आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का जिम्मा शहर की पुलिस का है। लेकिन गाहे बगाहे पुलिस पर भी अंगुलिया उठती रहती हैं। इन दिनों आगरा में पर्यटकों को लेकर आने वाले वाहन पुलिस की अवैध कमाई का ज़रिया बने हुये हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन वाहनों की है जिनका रजिस्ट्रेशन दिल्ली या आस-पास के राज्यों का है। आगरा की ट्रेफिक पुलिस हो या सिविल पुलिस जिसे मौका मिलता है वो हाथ साफ कर लेता है। पर्यटकों की सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस के हालात ये हो गये हैं कि उन्हे बाहर से आने वाले वाहन केवल सोने का अण्ड़ा देने वाली मुर्गी नज़र आते हैं। फिर चाहे उसमें कोई भी सवार हो, पर्यटक या फिर आगरावासी। राष्ट्रीय राजमार्ग से शहर मे दाखिल होने वाले चौराहों और रास्तों पर सुबह से ही पुलिस वाले तैनात रहते हैं। वहां लगने वाले जाम से उन्हे कोई मतलब नही लेकिन अगर कोई बाहर का वाहन बिना ‘एन्ट्री’ दिये बिना निकल जाये तो मुश्किल है। वसूली का सबसे बड़ा ठिकाना है सिकन्दरा चौराहा और उसके बाद वॉटरवर्क्स चौराहा। इसके अलावा शहर के प्रतापपुरा चौराहा और फतेहाबाद रोड़ भी पुलिस की अवैध कमाई के बड़े केन्द्र साबित हो रहें हैं। हालात इस कदर खराब हो चुकें हैं कि पुलिस ने बाहर से आने वाले इन वाहनों के लिये पैसे तय कर दिये हैं। इण्ड़िका या फिर किसी भी छोटी गाड़ी के लिये पांच सौ रुपये तय हैं। अगर पैसा नही मिला तो गाड़ी शहर मे नही जा सकती। भले ही उसके काग़ज़ात पूरे हों। पैसे लेकर बाकायदा एक कार्ड़ पर एन्ट्री की जाती है। फिर चाहे वो वाहन आगरा में कहीं भी घूमता रहे। वसूली की इस सारी कवायद के पीछे पुलिस वालों की दलील ये है कि चौराहे पर तैनाती के लिये दरोगा को हर दिन के हज़ारों रुपये ऊपर देने पड़ते हैं। रही सिपाही की बात को उसे अच्छे ‘एन्ट्री’ प्वॉइन्ट पर तैनाती के लिये हर माह एक मोटी रकम देनी पड़ती है। अब जब ऊपर तक इतना जाता है तो कुछ कमाने के लिये भी तो होना चाहिये। बस इसी फीक्र मे बेचारे पुलिस वाले धूप हो या छांव, आंधी या तूफान हर हाल मे कमाई का साधन ढूड़ते रहते हैं। पुलिस और वाहन चालकों या स्वामियों के बीच कई बार बात गाली गलौच से बढ़कर हाथापाई तक पंहुच जाती है। लेकिन कुछ दिन दिखावे के लिये सबकुछ ठीक रहता है पर फिर वही वसूली कार्यक्रम शुरु हो जाता है।
सबसे अहम बात ये है कि सारी कहानी पुलिस के आलाधिकारियों को पता होती है। लेकिन वो इन मामलों पर चुप्पी साधे रहते हैं। वजह है कि इस कमाई का एक हिस्सा ऊपर वालों को भी तो जाता है इसलिये लाख शिकायत करने के बावजूद किसी पुलिस वाले के खिलाफ कोई कार्यवाही नही होती। आला अधिकारियों से जब इस बारे मे बात की जाती है तो वो अनजान बन जाते हैं। उन्हे तो पता ही नही होता कि किस चौराहे पर क्या हो रहा है। बस अपने कारिन्दो को देखने की बात दोहराते हैं। एक रोना सरकार का रोया जाता है कि सरकार के कामों से अधिकारियों को फुरसत कहां कि वो देख सकें कि किस चौराहे पर क्या हो रहा है।
इस पूरे मामले के दौरान सबसे बुरा असर पड़ता है गाड़ी मे बैठे पर्यटक पर जो ये सारा माजरा समझ नही पाता। कई बार पुलिसवाले पर्यटकों के सामने ही वाहन चालक से वसूली के लिये मार पिटाई शुरु कर देतें हैं। जिसे देखकर पर्यटक सहम जाते हैं और खासकर विदेशी पर्यटक तो हैरान रह जाते हैं कि यहां कि पुलिस किस तरह से किसी बेगुनाह को पैसे के लिये मारने पीटने पर आ जाती है। उनकी नज़रों मे पूरे भारत को लेकर सजाया गया ख्वाब और यहां की सभ्यता को लेकर सुनी कहानियां पल मे झूठी हो जाती हैं। बहरहाल केन्द्र और राज्य सरकार दुनियाभर के पर्यटकों की आमद का इन्तज़ार कर रही है। कॉमन वेल्थ गेम्स सर पर हैं। लाखों पर्यटकों के भारत आने की उम्मीद भी है। ऐसे में दिल्ली के बाद पर्यटकों की सबसे ज़्यादा आमद आगरा में होगी। लेकिन अवैध वसूली में नम्बर वन का खिताब पा चुकी आगरा पुलिस पर्यटकों की हिफाजत का ख्याल रखेगी या फिर अपनी जेब का, ये सवाल अब सामने खड़ा दिखाई दे रहा है ?

Monday, May 24, 2010

गर्मी का कहर.....

गर्मी का रोज़-ओ-शब की क्यूंकर करूं बयां,

डर है कि मिस्ल-ए-शम्मा ना जलने लगे ज़ुबां,


ये लू के अलहज़र ये हरारत के आलामां,


यूं कि ज़मीं तो सुर्ख है और ज़र्द आसमां....

Sunday, March 7, 2010

इलैक्ट्रॉनिक कचरा बन रहा है बड़ा खतरा

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप कंप्यूटर जैसी इलैक्ट्रॉनिक चीज़ें जब इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती हैं तो उनसे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भारी ख़तरा पैदा हो रहा है।
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम ने तैयार की है जिसमें ऐसे नए नियम और क़ानून बनाने का आहवान किया गया है जो ये सुनिश्चित करें कि इस तरह का इलैक्ट्रॉनिक कूड़ा-कचरना फेंकने के लिए कड़े मानदंड अपनाए जाएँ। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल की इंडोनेशिया के बाली में सोमवार को शुरू हो रही एक बैठक के अवसर पर जारी की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इलैक्ट्रॉनिक दुनिया में इतनी तेज़ी से हो रही प्रगति और बदलावों के फ़ायदों के अलावा नुक़सान वाला पक्ष भी है, ख़ासतौर से विकासशील देशों में इलैक्ट्रॉनिक कूड़े-कचरे ने पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए भारी ख़तरा पैदा कर दिया है। मुश्किल ये है कि जिस रफ़्तार से टेलीविज़न, मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर ख़रीदे जाते हैं उसी रफ़्तार से पुरानी इलैक्ट्रॉनिक चीज़ों को सुरक्षित तरीक़े से फेंकने के प्रयास नहीं किए जाते हैं। इन चीज़ों की बिक्री हाल के समय में बहुत तेज़ी से बढ़ी है। इसके उलट विकसित देशों में इन चीज़ों को इस्तेमाल के बाद ख़राब होने पर फेंकने का एक सुरक्षित तरीका अपनाया जाता है जिसे री-साइकलिंग कहा जाता है जबकि विकासशील देशों में इसके लिए कुछ ख़ास चिंता नज़र नहीं आती है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम में अनुमान लगाया गया है कि इलैक्ट्रॉनिक कूड़ा-कचरा दुनिया भर में प्रतिवर्ष चार करोड़ टन की रफ़्तार से बढ़ रहा है, ख़ासतौर से भारत और चीन जैसे देशों में इस तरह का कूड़ा-कचरा अगले दस वर्षों में 500 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
इलैक्ट्रॉनिक चीज़ों में धातु और कुछ इस तरह के तत्व होते हैं जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बेहद ख़तरनाक होते हैं इसलिए इन वस्तुओं को सुरक्षित तरीके से फेंकने की व्यवस्था यानी री-साइकलिंग एक जटिल और महंगा काम है। लेकिन बहुत से देशों में इलैक्ट्रॉनिक चीज़ों को इस्तेमाल के बाद उनसे होने वाले नुक़सान की परवाह किए बिना ही सामान्य कूड़े-कचरे में ही फेंक दिया जाता है और ऐसे देशों में चीन भी शामिल है। इलैक्ट्रॉनिक कूड़े-कचरे में से इस तरह की किरणें निकलती हैं जो हवा में जाती हैं जिससे पर्यावरण को नुक़सान पहुँचता है। जबकि हम जानते हैं कि चीन दुनिया भर में इलैक्ट्रॉनिक सामान तैयार करने वाला एक बड़ा देश है जिसका इलैक्ट्रॉनिक सामान यूरोप और अमरीका के बाज़ारों में भरा पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इलैक्ट्रॉनिक कूड़े-कचरे को फेंकने और सुरक्षित तरीक़े से उसे फिर से इस्तेमाल करने के लिए तुरंत ठोस क़दम उठाने होंगे नहीं तो बहुत से देशों में इस कचरे के पहाड़ खड़े हो जाएंगे जिससे ना सिर्फ़ पर्यावरण को नुक़सान होगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी भारी ख़तरा पैदा हो जाएगा। रिपोर्ट में आहवान किया गया है कि इलैक्ट्रॉनिक सामान को फेंकने और उसे ठिकाने लगाने यानी री-साइकिलिंग के लिए ठोस नियम और क़ानून तुरंत बनाए जाएँ। हालाँकि संयुक्त राष्ट्र ने यह भी स्वीकार किया है कि ऐसे नियमों का नतीजा महंगा साबित हो सकता है मगर उनसे नई नौकरियाँ मिलेंगी, सोना और चाँदी जैसे महंगे धातु इकट्ठे होंगे जो इलैक्ट्रानिक चीज़ों में इस्तेमाल होते हैं और एक साफ़-सुथरा पर्यावरण क़ायम रखने में मदद तो मिलेगी जिससे लोगों के स्वास्थ्य को भी कम ख़तरा पैदा होगा। (बीबीसीहिन्दी.कॉम)

Friday, January 15, 2010

सैय्यद राजू की उपलब्धि...

ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की प्रेम कहानी पर लिखी ब्रिटिश लेखिका शरबनी बसु की चर्चित किताब "विक्टोरिया एण्ड अब्दुल" मे आगरा के वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद राजू ने सहयोग किया है। इस सहयोग के लिये शरबनी ने किताब की भूमिका मे उनके नाम का ज़िक्र भी किया है। इस किताब को लन्दन मे लॉन्च किये जाने के बाद भारत मे भी उतारा गया है। इस किताब मे महारानी विक्टोरिया और अब्दुल करीम के प्रेम की वो अनछुई दास्तान है जो अब तक दुनिया से छिपी रही। इस किताब मे करीम का आगरा से सम्बन्ध और उनकी निशानियों का उल्लेख किया गया है। आगरा के वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद राजू ने इस किताब में करीम से जुडे पहुलओं को जुटाया है। साथ यहां से सारी तस्वीरे भी शरबनी को मुहैय्या कराई हैं। इस काम के लिये सैय्यद राजू को 11 जनवरी को ब्रिटिश दूतावास मे आयोजित एक कार्यक्रम मे सम्मानित भी किया

Friday, December 25, 2009

MERRY CHRISTMAS



WISH



YOU



MERRY



CHRISTMAS

Monday, November 9, 2009

महंगाई को लेकर बवाल

मौहब्बत का शहर का आगरा आज दिन भर दहला रहा। बढती महंगाई के विरोध को लेकर शहर मे जो चिन्गारी दो दिन पहले भड़की थी। आज वो शोला बन गयी। शुरुआत शहर के जीवनी मण्डी चौराहे से हुई जहां स्थानीय लोगों महंगाई का विरोध जताने के लिये सड़को पर उतर आये। जाम लगा दिया गया। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो भीड़ ने उग्र होकर पथराव शुरु कर दिया। वाहनों मे आग लगा दी गयी। पुलिस को मजबूर होकर फायरिंग करनी पड़ी। भगदड़ और फायरिंग मे दर्जनों लोग जख्मी हो गये। दूसरी तरफ खन्दारी चौराहे पर हाइवे को महिलाओं ने जाम कर दिया। उनका हौंसला बढाने के लिये भाजपा के कार्यकर्ता भी आ गये। यहां भी हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लॉठीचार्ज करना पड़ा। दोनों जगह घण्टो तनाव की स्थिति बनी रही। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। लेकिन एक सवाल मेरे सामने है कि क्या ये विरोध यहीं खत्म हो जायेगा? मुझे लगता है कि ये शुरुआत है आज आगरा है तो कल दिल्ली के लोग भी महंगाई का विरोध करने को सड़कों पर आ सकते हैं... और परसों लखनऊ के। इसके पीछे बढती कीमतों पर सरकार का नियंत्रण खोना ही सबसे बड़ी वजह मुझे नजर आती है। विरोध करने वालों को तो गोली और लॉठी से रोका जा सकता है लेकिन उनके विचारों को मार पाना किसी सरकार के बस मे नही है। महंगाई का विरोध भी एक विचार बन गया है। और ये फैल रहा है जब लोग आगरा मे हुये बवाल की ख़बर देख या पढ रहें होगें तो ये विचार खुद-ब-खुद उनके मन मे आ सकता है। कहने का मतलब है कि ताकत का इस्तेमाल कर विरोध या लोगों को रोका जा सकता है। लेकिन परेशानी से उबरे मानसिक विरोध और विचार को रोकने का तरीका केवल एक है वो है कीमतों पर काबू पाना। कितनी मज़ाकिया बात लगती है रोज़ ये ख़बर पढना की महंगाई की दर कम हो रही है लेकिन हकीकत बिल्कुल उसके उलट है। दाल, सब्ज़ी और घरेलू ज़रुरत के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं कीमते आम आदमी की हद से बाहर हो रही है। तो लोग क्या करें? किस से कहें? कहीं सुनवाई नही होती तो नतीजा ऐसे हिंसक विरोध के रुप मे सामने आता है। ज़रुरत इस बात की है कि सरकार इस बात पर ध्यान दे और महंगाई को कम करने की दवा ढूंढे। नही तो ये आग आगरा ही पूरे देश मे फैल जायेगी।

Tuesday, October 27, 2009

बदल जायेगी इंटरनेट की दुनिया

इंटरनेट की नियामक संस्था आईसीएएनएन के मुताबिक इंटरनेट अपने अस्तित्व के बाद के सबसे बड़े बदलाव के कगार पर है। चालीस वर्ष पहले इंटरनेट अस्तित्व में आया था और अब पहली बार इंटरनेट पर टाइप किए जाने वाले पते या वेब एड्रेस के अक्षर लैटिन से अलग लिपि में होंगे। यह प्रस्ताव 2008 में स्वीकार किया गया था जिसके तहत डोमेन नाम इत्यादि एशियाई, अरबी और अन्य लिपियों में भी रखे जा सकेंगे।
इंटरनेट कोआपरेशन फॉर एसाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (आईसीएएनएन) के अनुसार इस प्रस्ताव को अंतिम रुप 30 अक्तूबर को दिया जाएगा और गैर लातिन लिपि में पहला कार्य 16 नवंबर को शुरु होगा। दक्षिण कोरिया में आईसीएएनएन के अध्यक्ष रॉड बेकस्ट्राम ने संगठन के एक सम्मेलन में बताया कि ये अंतरराष्ट्रीय डोमेन नाम अगले साल के मध्य से काम करना शुरु कर देंगे। उनके मुताबिक ‘‘ आज दुनिया भर में क़रीब डेढ़ अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन इनमें से आधे लोग ऐसी भाषा बोलते हैं जिसकी लिपि लैटिन नहीं है।’’ बैकस्ट्राम कहते हैं, ‘‘ दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों के लिए यह बदलाव बेहद ज़रुरी है ताकि भविष्य में भी इंटरनेट का विस्तार हो सक।’’ इस बदलाव को लागू करने के लिए बने बोर्ड के चेयरमैन पीटर डेनगेट थ्रस का कहना था कि योजना 2008 में पारित हुई थी लेकिन इसके लिए सिस्टम के परीक्षणों में काफ़ी समय लगा है। उनका कहना था कि ‘‘आपको इसकी तारफ़ी करते नहीं थकेंगे कि यह कितना जटिल काम है। हमने एक बिल्कुल अलग अनुवाद की प्रणाली बना दी है।’’ थाईलैंड और चीन में इस तकनीक का इस्तेमाल कर उनकी भाषा में आईपी एड्रेस तैयार होते हैं लेकिन इन्हें अभी तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है। (bbcindi.com)

Friday, October 16, 2009

दीपोत्सव की शुभकामनाऐं


आपके यहां

धन की बरसात हो

सुख-शान्ति का निवास हो

माँ लक्ष्मी का आर्शीवाद हो

आपके संकटों का विनाश हो

आपको और आपके परिवार को

दीपावली की हार्दिक शुभकानाऐं।

Monday, October 12, 2009

सरहद पार के दो मेहमान....

पाकिस्तान की दो महिला रॉकस्टार ज़ेब और हनिया पिछले दिनों हिन्दुस्तान आईं। दोनों बीबीसी के दिल्ली दफ़्तर पँहुची तो दोनों ओर के संगीत, सियासत और संबंधों पर बातचीत का सिलसिला चल निकला. बीबीसी के वरिष्ठ संवाददाता पनीनी आनन्द ने इन दोनों से बातचीत की। आपके लिये यहां पेश हैं इसी बात-चीत के कुछ अंश-